फेसबुक टॉक – अंग्रेजी शिक्षण ओर आजकी पीढ़ी।

★★★ फेसबुक पोस्ट ओन २८ जून ★★★

अंग्रजी भाषा शिखाने के पीछे जो उद्देश्य पुराने लोगो का आज़ादी से पहले था। उस उद्देश्य को नई पीढ़ीने बर्बाद कर दिया और तो ओर आनेवाली पीढ़ी को भी अंग्रेजी के सामने लाचार बनाकर खड़ा कर दिया।

क्या यही वजह थी उस पीढ़ी के बुजुर्गों की…?

क्या इसी दिन को देखने के लिए उन्होंने अपने संतानो को इंग्लिश सीखने के लिए तैयार किया था…?

जवाब – हरगिज़ नही।

लेकिन इस युवा पीढिने अपने संस्कारो को संभालने के बजाय अंग्रेजो के दिखावे को अपना लिया, वरना उस पीढिने तो यही सपना देखा होगा कि जो ज्ञान आज हमारी पीढ़ी को अंग्रेजी की वजह से नही मिल पा रहा वो ज्ञान हमारे बाद वाली पीढ़ी के अंग्रेजी सीख लेने से आनेवाली पीढियो को यही ज्ञान हिंदी में उपलब्ध करवाएंगी। ओर भारत का हर नागरिक शिक्षित हो पायेगा ओर हर ज्ञान को आसानी से पा शकेगा।

लेकिन उस अंग्रेजी सीखने वाली पीढिने भी अंग्रेजो वाली अकड़ सीख ली और अंग्रेजी न जानने वालों को अनपढ़ कहकर धुत्कार दिया।

~ सुलतान सिंह ‘जीवन’

( कुछ मनमे उबलते विचार…)

★★★ डिस्कशन ऑन थॉट्स ★★★

He – आधुनिक पीढिने आखिर कैसे बर्बाद किया उद्देश्य को…?

Me – आपने ठीक से पढ़ा ना..??

He – जी, बिल्कुल अच्छे तरीके से…?

Me – क्या उस वक्त के लोग अंग्रेजी सीखकर जीन्स-टीशर्ट पहन कर, काला चश्मा लगाकर पूरे अंग्रेज बनकर अमरीका, यूरोप या इंग्लेंड जाना चाहते थे।

He – नही पर उस वक्त गुलामी की वजह से अंग्रेजी भाषाका इस्तेमाल बढ़ने लगा था, रोज बरोज के कामकाज के लिए भी उन्हें अंग्रेजी जानने वाले चंद अंग्रेजो के भारतीय टट्टू लोगोकी गुलामी करनी पड़ती थी।

Me – बिल्कुल सही। ओर, आज के हालात क्या है?

He – आज के हालात गुलामी वाले वक्त से काफी हद तक सुधरे हुए है। आज हर कोई पढ़ा लिखा है। हर कोई अपना काम खुद कर शकता है। आज हम अंग्रेजो के गुलाम नही रहे। आज भारत के लोग भी विदेशो में जाकर फर्राटेदार इंग्लिश बोल शकते है।

Me – क्या आपने जो कुछ भी कहा है, वोही कार्य भारत का हर नागरिक कर शकता है।

He – इसमे तो युवा पीढ़ी नही लेकिन भारत की शिक्षण प्रणालियां जिम्मेदार है।

Me – क्यो, कैसे??

He – क्योकिं बच्चो को शुरुआत से हिंदी, गुजराती, मराठी, पंजाबी जैसे प्रवाहो में पढ़ाया जाता है। आखिर कार बारहवीं के बाद तो सबको अंग्रेजी में आना ही पड़ता है, फिर क्यों न फर्स्ट स्टैंडर्ड से ही उन्हें अंग्रेजी में एडमिशन दिलवाया जाय। और अंग्रेजी पढना आवश्यक कर दिया जाए ताकि बच्चा आगे जाकर अटके नही।

Me – मतलब हम भी अंग्रेज बन जाये??

He – वो जरूरी भी है।

Me – लेकिन इससे तो भारतीय भाषाओं का जो कुछ औसत बचा ज्ञान है वो भी लुप्त हो जाएगा। मतलब आज की पीढ़ी तो उस पीढिने सोचे हुए उद्देश्य के मूल आधार को भी नष्ट करने का बनता हर प्रयाश करने के बारे में सोचने लगी है। या शुरू कर दिया है।

He – वो कैसे…?

Me – जब शुरू से हमे अंग्रेजी ही पढ़ना है तो फिर अपनी भाषाओ ओर संस्कृति जैसे किसी उद्देश्य के बारेमे सोचने की भी क्या जरूरत है।

He – फिर आप ही बताइए क्या करना चाहिए..?

Me – वही जो उस पीढिने अपने बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने के लिए अपने आपको समजाया था। उसी लक्ष्यको हमे मंजिल बनाकर चलना होगा।

He – वो कैसे?

Me – उस पीढ़ी दर पीढिने जरूर ये सोचा था की आज अगर गुलामी के वक्तमें हमारी संताने अंग्रेजी शिख लेंगी तो वो आने वाले कल के लिए काफी ज्ञान अपने देशवासियो के लिए भी संजोएँगे। ओर वो ही ज्ञान पिछली कई पीढियो तक उन पूर्वजोकी यातनाओ को सहकर संतानो को पढ़ाकर भविष्य के लिए ज्ञान अर्जित करने की भावनाओ को याद करेंगे। लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ। उनकी कुर्बानियो को अपनो ने ही डूबा दिया।

He – कैसे?

Me – उस वक्त वदेश जाकर या बड़े बड़े कॉलेजो से पढ़ लिखकर लौटने वाली हर पीढ़ी अपने आप को अंग्रेजो की तुलनामे रखकर अपने आप को बड़ा बताने की कोशिशों में जुट गई। जबकि उन्हें दरअसल अंग्रेजो को करके ये दिखाना था की भारत किसी भी क्षेत्रमे दुनिया से पीछे नही है लेकिन हुआ बिलकुल उल्टा। जिन लोगो पर भारत के भविष्यका आधार रखा गया था उन्होंने ही उस आशाओ को जिंदा जला दिया। उन्होंने भी भारतका विश्वमे प्रतिनिधित्व करने के बजाय अंग्रेजी का प्रदर्शन किया और नतीजा ये हुआ की अंग्रेजो के साथ मिलकर कुछ भारतीय अंग्रेजोने भी देश को चूशना शुरू कर दिया। जो उद्देश्य उन्होंने देखा था वो चूरचूर तो हुआ ही था लेकिन उसका गम कुछ हद तक सह लेना आसान भी होता लेकिन उस भारतीय अंग्रेज पीढ़ी के बाद आनेवाली पीढ़ीने तो अंग्रेजी भाषाओ को इतना बढ़ावा दे दिया कि अंग्रेजी के बिना जीना मुश्किल सा हो गया। और आज हालात ये है कि आजादी के बाद भी कई भारतीय लोग ज्ञान से वंचित है। जानना चाहते हो क्यू? क्योंकि अंग्रेजी के अलावा ज्ञान बटना ही बंध हो गया। ऊपर से अंग्रेजी सीखने के बाद जो ज्ञान भारतीय अंग्रेजो ने अर्जित किया उसे भी उन्होंने अंग्रेजी भाषामे दर्शाया। जिससे आनेवाली पीढ़ी अपने भारतीयों द्वारा प्राप्त हुआ ज्ञानभी अंग्रेजी के बिना शिख पाना मुश्किल हो गया। ओर जो कुछ ज्ञान प्राचीन वेदों पूराणो से भी पाया जा शकता था। उस पर भी अंग्रेज बने हुए भारतीयों ने धीरे धीरे अद्रश्य पाबंदिया जड़ दी। क्योंकि अगर उस ज्ञान को बढ़ावा दिया जाता तो उनका अंग्रेजी ज्ञान व्यर्थ हो जाता। शायद यही वजह रही होगी जिससे समय के साथ अंग्रेजीको बढ़ावा मिलता रहा।

He – वेद पुराणों वाला ज्ञान तो उपलब्ध हमेशा से उपलब्ध था। अगर में सही हु तो, उसे तो युवा पीढिने नष्ट नही किया? वो तो आज के समय मे भी नखसिख उप्लब्ध है।

Me – सीधे तरीके से नही लेकिन, आड़ कतरे तरीको से तो उसे नष्ट ही किया गया है।

He – कोनशे आडकतरे तरीके?

Me – आप अंग्रेजी के इस वक्त में पुराणों को शिख के भी क्या करेंगे? क्या आप एक मैनेजर को इस आधार पर काम के योग्य गिनेंगे जिसे मैनेजमेंट के आधुनिक फंडे न आते हो और महाभारत और रामायण जैसे पुराण कंठस्त हो। तो जवाब है साफ तौर पर ना। आखिर कार गुजरते समय के साथ ऐसा बदलाव लाया गया कि अंग्रेजी के बिना ना आगे पढ़ा जा शकता था और ना ही रोजगार आसानी से पाया जा शकता था। उसी वजह से समय के साथ बदलना ही उचित समझकर भारतीय सभ्यता में अनचाहा बदलाव आता ही रहा। और आज जो बदलाव है, वो ये है की १२वी कक्षा के बाद अंग्रेजी आवश्यक हो गया है। क्योंकि ऐसा कोई कोर्ष ही नही बचा है जिसे पढे लिखे लोगो ने हमारी स्थानिक भाषाओंमें निर्मित किया हुआ हो।

He – कुछ कोर्ष है?

Me – कुछ है, जिनका आर्थिक रोजगारी वाले क्षेत्रमे कोई महत्व नही है। उन डिग्रियो के आधार पर कोई ढंग का काम नही मिलता। ओर मिल भी जाये तो अंग्रेजी न आने की वजह से उसे धुत्कार दिया जाता है।

He – में फिर भी ये नही मानता के नई पीढ़ीने ही पुरखो के उद्देश्य को नष्ट किया है।

Me – अच्छा ठीक है, फिर आप ही बताइए कि आखिर ऐसी क्या वजह रही होगी, जिस वजह ने हमारे पूर्वजो को उस वक्त अंग्रेजी शिखने पर मजबूर किया होगा।

He – किसी भी चीज़ का न मिल पाना। अंग्रेजो की गुलामी ओर उनका शाशन। उस वक्त हर कायदा कानून, कागजाद, शिक्षण प्रणाली वगेरे वगेरे…।

Me – अच्छा तो आप ये मानते है कि आपके पूर्वजो ने अंग्रेजो के सामने आप लाचार न बने इसी वजह से अपनी आनेवाली पीढ़ी को अंग्रेजी शिखाने का निश्चय किया होगा।

He – लेकिन मेरा सवाल ये था कि उनके उद्देश्य को नई पीढिने बर्बाद कैसे किया। आज हमारी जनरेशन काफी अच्छा अंग्रेजी बोल लेती है। आज भी हम अंग्रेजी विषयो के साथ स्नातक ओर अनुस्नातक जैसी पदवियां हासिल कर रहे है। आज की युवा पीढ़ी ब्रिटन ओर अमेरिका से ज्यादा आगे बढ़ चढ़ कर अंग्रेजी क्षेत्रोंमें भी अपना नाम अर्जित कर रही है।

Me – लेकिन आज इस वक्त तक कि भी बात की जाए तो, उनकी तो कोई पीढ़ी हिंदी नही शिख रही। उनकी किसी पीढ़ी ने हिंदी में किसी तरह की पदवियां हासिल नही की। उन्होंने कुछ भी संसोधित ज्ञान हिंदी में अर्जित नही किया। हॉ, हमने अपना सारा ज्ञान अंग्रेजी में जरूर अर्जित किया। ताकि अब हमारी आनेवाली हर संताने भी अंग्रेजी शिखने के लिए लाचार हो जाएंगी। क्योकि उनके पास भी हमारे ही पूर्वजो की तरह ज्ञान पाने का ओर कोई रास्ता नही होगा। लेकिन तुम जानते हो दोस्त? हमारे पूर्वज इतने दु:खी नही हुए होंगे जितने हमारे आनेवाले संतान हमसे दुःखी होंगे। क्योकि हमारे पूर्वजों की ये मजबूरी थी क्योंकि वो अंग्रेजो के गुलाम थे, ओर आज हम आज़ाद होकर भी उनकी अंग्रेजी के गुलाम है। इसका मतलब समझते हो दोस्त, हम आजाद न हुए थे न होंगे। हम आज भी अंग्रेजो के ही गुलाम है। क्योकि हम आज भी अपने पुस्तेनी ज्ञानको नही पा सके हमने अंग्रेजी तो शिख लिया पर हिंदी को भुला दिया। हमने बाजू वाली आंटी से इतना गहरा रिस्ता बना लिया कि पास ही में सिसकती हमारी माँ की आंसुओ की तड़प हमे कभी समझ नही आई।

He – तो आप ये कहना चाहते है कि अंग्रेजी जरूरी नही है।

Me – जब हर जगह आज यही चलती है तो भला जरूरी कैसे नही। लेकिन आने वाली पीढ़ी को शिक्षा पाने के लिए सिर्फ अंग्रेजी के आगे न जुकना पड़े इतना ध्यान हमे रखना चाहिए। यही हमारा हमारी पीढियो के प्रति अर्जित किया महत्वपूर्ण योगदान होगा। और ऐसा नया ज्ञानभी हम अर्जित सिर्फ अपनी भाषाओ में अर्जित करेंगे जिससे हमारी पीढियो को अंग्रेजी के बिना भी आवश्यक ज्ञान जरूर प्राप्त हो शके। भले ही हम अंग्रेजी शिखे, सीखनाभी चाहिए क्योंकि अगर हम आनेवाली पीढ़ी के लिए आदर्श शिक्षण प्रणाली बनानी है तो हमे बहोत सारे ज्ञान की जरूरत होंगी। और उसकी पूर्ति के लिए हमे कुछ हद तक अंग्रेजी ज्ञानका सहारा भी लेना पड़ेगा। लेकिन याद रहे उसके गुलाम न बने। क्योकि दोस्त हम भारत मे है ना कि अमरीका या ब्रिटन में।

He – ये बात बिलकुल सही कही। में अब समझ गया कि अंग्रेजी सीखना जरूर है लेकिन सिर्फ अंग्रेजी नही सीखना है।

★★★ चर्चित मुद्दा ★★★

अंग्रेजी सीखना हमारे ज्ञानमे बढ़ावा जरूर करता है, लेकिन अंग्रेजी ही हमारी ज्ञानकी सीमाओ को तय करता है ये बात कतई सच नही है।

अंग्रेजी सिर्फ एक भाषा के तौर पर सीखना अच्छी बात है, लेकिन अपने आप को ऊंचा दिखाने के लिए अंग्रेजी सिखना अहम से ज्यादा कुछ नही है।

~ सुलतान सिंह ‘जीवन’
( ११:०० pm, २८ जून २०१७ )

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s