५८. पीछे पूरी कायनात हे।
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किसने कहा है तुजे, के तू अनाथ हे,
आगे तू, और पीछे पूरी कायनात हे,

जरुरी नहीं होता रंग रुपका मिलना,
जरुरी तो बस मिलना खयालात हे,

हर कोई जानता है मेरी आस्था को,
बस दुनिया ज्ञात, और तू अज्ञात हे,

आखिर जिंदगी क्यु जीना छोड़ दू,
अभी मनमे कई बाकी सवालात हे,

जब कभी नहीं होती तू आसपास,
लगता हे दुनिया मानो हवालात हे,

इस लिए ना छोड़, हम आशिक हे,
अभी तो बाकी पीछे पूरी जमात हे,

किसने कहा है तुजे, के तू अनाथ हे,
आगे तू, और पीछे पूरी कायनात हे,

~ सुलतान सिंह ‘जीवन’
( १२:५४ रात्री, १ एप्रिल २०१७ )
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© Poem No. 58
Language – Hindi
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