जब एक दिन ये देश फिर जागेगा,
हरबार ये बस, हिंदुस्तान मांगेगा,

न यहा कोई धर्म होगा न जात,
तब जाके देशका इंसान जागेगा,

भले मर जाये धर्मका नाम यहा,
ये इंसानियत का फरमान मांगेगा,

ना रहेगा भेद अल्ला भगवानमें,
तभी यहाँ सच्चा इन्सान जागेगा,

मेरा ये देश कल फिर से जागेगा,
थोड़ी भले सही देशभक्ति मांगेगा,

दिखावेमें तिरंगा रस्ते गुमता रहेगा,
अगले दिन अपना सम्मान मांगेगा,

कल जुकना भले तिरंगे के सामने,
वरना वो अपना सम्मान मांगेगा,

राजनेता सोये रहेंगे कही महेलो मे,
सड़क पे भी रातभर तिरंगा जागेगा,

ना जात, ना पात और ना ही धर्म,
ये बस एकजुठ हिंदुस्तान मांगेगा,

जब एक दिन ये देश फिर जागेगा,
हरबार ये बस, हिंदुस्तान मांगेगा,



~ सुलतान सिंह ‘जीवन’
( ०९:१४, १५ अगस्त २०१६)

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