Mahobat shyam ki…

भूल जाना तू ये महोबत अब श्याम की,
ये नहीं हे वो राधा, ये तो सीता राम की,

बात न कर यहापे राधा और श्याम की,
गोकुल नहीं, ये तो अयोध्या हे राम की,

मिलेगी नहीं अब रासलीलाये श्यामकी,
नहीं हे वृंदावन, ये तो कर्मभूमि राम की,

सूर्पनखा से बोलो न करे इज़हारे इश्क,
श्याम नहीं ये, यही तो मर्यादा राम की,

सवाल नहीं महोबतका, ये अग्निपरीक्षा,
ये मुक्त्तता नहीं, दुनियादारी हे राम की।


~ सुलतान सिंह ‘जीवन’
(७:१९, ३ अगस्त २०१६)

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