कभी इश्क की भी इम्तेहान हो जाए,
तू हमारी, ओर हम सिर्फ तूमारे हो जाए।

ना चले या तो नैनो से सीधे तीर हमपे,
अगर चले तो भले दिलके पार हो जाए,

रहेगी ये महोबत कितने दिन ऐ सनम,
भले ही आज इकरार खुले आम हो जाए,

कहेंगे लोग क्या, मत सोच आज यहा,
आज भले दुनियादारी नीलाम हो जाए,

कर इजहार-ए-महोबत तब तलक आज,
जब तलक हमें भी इश्क बेसुमार हो जाए,


~ सुलतान सिंह ‘जीवन’
(३:१९, ४ अगस्त २०१६)

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